महाभारत 13.53.50
अवतीर्य रथश्रेष्ठाद्दंपती तौ मुमोच हविमोच्य चैतौ विधिवत्ततो वाक्यमुवाच ह
avatīrya rathaśreṣṭhāddaṃpatī tau mumoca havimocya caitau vidhivattato vākyamuvāca ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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