महाभारत 13.53.56
गम्यतां स्वपुरं पुत्र विश्रान्तः पुनरेष्यसिइहस्थं मां सभार्यस्त्वं द्रष्टासि श्वो नराधिप
gamyatāṃ svapuraṃ putra viśrāntaḥ punareṣyasiihasthaṃ māṃ sabhāryastvaṃ draṣṭāsi śvo narādhipa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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