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महाभारत 13.54.24
ततः प्रोवाच कुशिको भार्यां हर्षसमन्वितःपश्य भद्रे यथा भावाश्चित्रा दृष्टाः सुदुर्लभाः
tataḥ provāca kuśiko bhāryāṃ harṣasamanvitaḥpaśya bhadre yathā bhāvāścitrā dṛṣṭāḥ sudurlabhāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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