महाभारत 13.54.33
ततः प्रकृतिमापन्नो भार्गवो नृपते नृपम्उवाच श्लक्ष्णया वाचा तर्पयन्निव भारत
tataḥ prakṛtimāpanno bhārgavo nṛpate nṛpamuvāca ślakṣṇayā vācā tarpayanniva bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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