महाभारत 13.54.5
चम्पकांस्तिलकान्भव्यान्पनसान्वञ्जुलानपिपुष्पितान्कर्णिकारांश्च तत्र तत्र ददर्श ह
campakāṃstilakānbhavyānpanasānvañjulānapipuṣpitānkarṇikārāṃśca tatra tatra dadarśa ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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