महाभारत 13.55.22
ततोऽहं रथमारुह्य त्वामवोचं नराधिपसभार्यो मां वहस्वेति तच्च त्वं कृतवांस्तथा
tato'haṃ rathamāruhya tvāmavocaṃ narādhipasabhāryo māṃ vahasveti tacca tvaṃ kṛtavāṃstathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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