महाभारत 13.58.36
न मे पिता प्रियतरो न त्वं तात तथा प्रियःन मे पितुः पिता राजन्न चात्मा न च जीवितम्
na me pitā priyataro na tvaṃ tāta tathā priyaḥna me pituḥ pitā rājanna cātmā na ca jīvitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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