महाभारत 13.6.14
ज्योतींषि त्रिदशा नागा यक्षाश्चन्द्रार्कमारुताःसर्वे पुरुषकारेण मानुष्याद्देवतां गताः
jyotīṃṣi tridaśā nāgā yakṣāścandrārkamārutāḥsarve puruṣakāreṇa mānuṣyāddevatāṃ gatāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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