महाभारत 13.6.31
पुरूरवाश्च राजर्षिर्द्विजैरभिहितः पुराऐल इत्यभिविख्यातः स्वर्गं प्राप्तो महीपतिः
purūravāśca rājarṣirdvijairabhihitaḥ purāaila ityabhivikhyātaḥ svargaṃ prāpto mahīpatiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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