महाभारत 13.6.32
अश्वमेधादिभिर्यज्ञैः सत्कृतः कोसलाधिपःमहर्षिशापात्सौदासः पुरुषादत्वमागतः
aśvamedhādibhiryajñaiḥ satkṛtaḥ kosalādhipaḥmaharṣiśāpātsaudāsaḥ puruṣādatvamāgataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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