महाभारत 13.61.39
सदा भवन्ति चोद्विग्नास्तस्य दुश्चरितैर्नराःयोगक्षेमा हि बहवो राष्ट्रं नास्याविशन्ति तत्
sadā bhavanti codvignāstasya duścaritairnarāḥyogakṣemā hi bahavo rāṣṭraṃ nāsyāviśanti tat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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