महाभारत 13.61.89
नास्ति भूमिसमं दानं नास्ति मातृसमो गुरुःनास्ति सत्यसमो धर्मो नास्ति दानसमो निधिः
nāsti bhūmisamaṃ dānaṃ nāsti mātṛsamo guruḥnāsti satyasamo dharmo nāsti dānasamo nidhiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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