महाभारत 13.61.8
यथा दानं तथा भोग इति धर्मेषु निश्चयःसंग्रामे वा तनुं जह्याद्दद्याद्वा पृथिवीमिमाम्
yathā dānaṃ tathā bhoga iti dharmeṣu niścayaḥsaṃgrāme vā tanuṃ jahyāddadyādvā pṛthivīmimām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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