महाभारत 13.62.40
संभवन्ति ततः शुक्रात्प्राणिनः पृथिवीपतेअग्नीषोमौ हि तच्छुक्रं प्रजनः पुष्यतश्च ह
saṃbhavanti tataḥ śukrātprāṇinaḥ pṛthivīpateagnīṣomau hi tacchukraṃ prajanaḥ puṣyataśca ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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