महाभारत 13.63.26
उदमन्थं ससर्पिष्कं प्रभूतमधुफाणितम्दत्त्वोत्तरास्वषाढासु सर्वकामानवाप्नुयात्
udamanthaṃ sasarpiṣkaṃ prabhūtamadhuphāṇitamdattvottarāsvaṣāḍhāsu sarvakāmānavāpnuyāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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