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महाभारत 13.63.30
गन्धाञ्शतभिषग्योगे दत्त्वा सागुरुचन्दनान्प्राप्नोत्यप्सरसां लोकान्प्रेत्य गन्धांश्च शाश्वतान्
gandhāñśatabhiṣagyoge dattvā sāgurucandanānprāpnotyapsarasāṃ lokānpretya gandhāṃśca śāśvatān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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