महाभारत 13.63.9
अपूपान्पुनर्वसौ दत्त्वा तथैवान्नानि शोभनेयशस्वी रूपसंपन्नो बह्वन्ने जायते कुले
apūpānpunarvasau dattvā tathaivānnāni śobhaneyaśasvī rūpasaṃpanno bahvanne jāyate kule
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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