महाभारत 13.67.10
तस्मै यमः समुत्थाय पूजां कृत्वा च वीर्यवान्प्रोवाच नीयतामेष सोऽन्य आनीयतामिति
tasmai yamaḥ samutthāya pūjāṃ kṛtvā ca vīryavānprovāca nīyatāmeṣa so'nya ānīyatāmiti
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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