महाभारत 13.67.19
तथापः सर्वदा देयाः पेयाश्चैव न संशयःपुष्करिण्यस्तडागानि कूपांश्चैवात्र खानयेत्
tathāpaḥ sarvadā deyāḥ peyāścaiva na saṃśayaḥpuṣkariṇyastaḍāgāni kūpāṃścaivātra khānayet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें