महाभारत 13.67.23
नीत्वा तं यमदूतोऽपि गृहीत्वा शर्मिणं तदाययौ स धर्मराजाय न्यवेदयत चापि तम्
nītvā taṃ yamadūto'pi gṛhītvā śarmiṇaṃ tadāyayau sa dharmarājāya nyavedayata cāpi tam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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