महाभारत 13.67.33
विवाहांश्चैव कुर्वीत पुत्रानुत्पादयेत चपुत्रलाभो हि कौरव्य सर्वलाभाद्विशिष्यते
vivāhāṃścaiva kurvīta putrānutpādayeta caputralābho hi kauravya sarvalābhādviśiṣyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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