महाभारत 13.69.17
ततस्तमपरं विप्रं याचे विनिमयेन वैगवां शतसहस्रं वै तत्कृते गृह्यतामिति
tatastamaparaṃ vipraṃ yāce vinimayena vaigavāṃ śatasahasraṃ vai tatkṛte gṛhyatāmiti
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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