महाभारत 13.69.25
अश्रौषं प्रच्युतश्चाहं यमस्योच्चैः प्रभाषतःवासुदेवः समुद्धर्ता भविता ते जनार्दनः
aśrauṣaṃ pracyutaścāhaṃ yamasyoccaiḥ prabhāṣataḥvāsudevaḥ samuddhartā bhavitā te janārdanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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