महाभारत 13.69.32
सतां समागमः सद्भिर्नाफलः पार्थ विद्यतेविमुक्तं नरकात्पश्य नृगं साधुसमागमात्
satāṃ samāgamaḥ sadbhirnāphalaḥ pārtha vidyatevimuktaṃ narakātpaśya nṛgaṃ sādhusamāgamāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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