महाभारत 13.7.7
यो दद्यादपरिक्लिष्टमन्नमध्वनि वर्ततेश्रान्तायादृष्टपूर्वाय तस्य पुण्यफलं महत्
yo dadyādaparikliṣṭamannamadhvani vartateśrāntāyādṛṣṭapūrvāya tasya puṇyaphalaṃ mahat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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