महाभारत 13.70.39
घृतालाभे च यो दद्यात्तिलधेनुं यतव्रतःस दुर्गात्तारितो धेन्वा क्षीरनद्यां प्रमोदते
ghṛtālābhe ca yo dadyāttiladhenuṃ yatavrataḥsa durgāttārito dhenvā kṣīranadyāṃ pramodate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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