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महाभारत 13.74.27
सांख्यशूराश्च बहवो योगशूरास्तथापरेअरण्ये गृहवासे च शूराश्चातिथिपूजनेसर्वे यान्ति पराँल्लोकान्स्वकर्मफलनिर्जितान्
sāṃkhyaśūrāśca bahavo yogaśūrāstathāparearaṇye gṛhavāse ca śūrāścātithipūjanesarve yānti parām̐llokānsvakarmaphalanirjitān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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