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महाभारत 13.74.31
सत्येन देवान्प्रीणाति पितॄन्वै ब्राह्मणांस्तथासत्यमाहुः परं धर्मं तस्मात्सत्यं न लङ्घयेत्
satyena devānprīṇāti pitṝnvai brāhmaṇāṃstathāsatyamāhuḥ paraṃ dharmaṃ tasmātsatyaṃ na laṅghayet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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