महाभारत 13.74.6पितृशुश्रूषणे किं च मातृशुश्रूषणे तथाआचार्यगुरुशुश्रूषास्वनुक्रोशानुकम्पनेpitṛśuśrūṣaṇe kiṃ ca mātṛśuśrūṣaṇe tathāācāryaguruśuśrūṣāsvanukrośānukampaneइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें