महाभारत 13.76.21
तत्तेजस्तु ततो रौद्रं कपिला गा विशां पतेनानावर्णत्वमनयन्मेघानिव दिवाकरः
tattejastu tato raudraṃ kapilā gā viśāṃ patenānāvarṇatvamanayanmeghāniva divākaraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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