महाभारत 13.76.25
न दुष्यत्यनिलो नाग्निर्न सुवर्णं न चोदधिःनामृतेनामृतं पीतं वत्सपीता न वत्सला
na duṣyatyanilo nāgnirna suvarṇaṃ na codadhiḥnāmṛtenāmṛtaṃ pītaṃ vatsapītā na vatsalā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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