महाभारत 13.76.5
असुर्या नाम ते लोका गां दत्त्वा तत्र गच्छतिपीतोदकां जग्धतृणां नष्टदुग्धां निरिन्द्रियाम्
asuryā nāma te lokā gāṃ dattvā tatra gacchatipītodakāṃ jagdhatṛṇāṃ naṣṭadugdhāṃ nirindriyām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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