महाभारत 13.77.10
एकां च दशगुर्दद्याद्दश दद्याच्च गोशतीशतं सहस्रगुर्दद्यात्सर्वे तुल्यफला हि ते
ekāṃ ca daśagurdadyāddaśa dadyācca gośatīśataṃ sahasragurdadyātsarve tulyaphalā hi te
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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