महाभारत 13.77.18
गोमयेन सदा स्नायाद्गोकरीषे च संविशेत्श्लेष्ममूत्रपुरीषाणि प्रतिघातं च वर्जयेत्
gomayena sadā snāyādgokarīṣe ca saṃviśetśleṣmamūtrapurīṣāṇi pratighātaṃ ca varjayet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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