महाभारत 13.77.2
सर्वलोकचरं सिद्धं ब्रह्मकोशं सनातनम्पुरोहितमिदं प्रष्टुमभिवाद्योपचक्रमे
sarvalokacaraṃ siddhaṃ brahmakośaṃ sanātanampurohitamidaṃ praṣṭumabhivādyopacakrame
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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