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महाभारत 13.77.4
भीष्म उवाच · bhīṣma uvāca
तस्मै प्रोवाच वचनं प्रणताय हितं तदागवामुपनिषद्विद्वान्नमस्कृत्य गवां शुचिः
tasmai provāca vacanaṃ praṇatāya hitaṃ tadāgavāmupaniṣadvidvānnamaskṛtya gavāṃ śuciḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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