महाभारत 13.8.8
ये चापि तेषां श्रोतारः सदा सदसि संमताःविज्ञानगुणसंपन्नास्तेषां च स्पृहयाम्यहम्
ye cāpi teṣāṃ śrotāraḥ sadā sadasi saṃmatāḥvijñānaguṇasaṃpannāsteṣāṃ ca spṛhayāmyaham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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