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महाभारत 13.81.4
गाव ऊचुःकासि देवि कुतो वा त्वं रूपेणाप्रतिमा भुविविस्मिताः स्म महाभागे तव रूपस्य संपदा
gāva ūcuḥkāsi devi kuto vā tvaṃ rūpeṇāpratimā bhuvivismitāḥ sma mahābhāge tava rūpasya saṃpadā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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