महाभारत 13.82.17धारयन्ति प्रजाश्चैव पयसा हविषा तथाएतासां तनयाश्चापि कृषियोगमुपासतेdhārayanti prajāścaiva payasā haviṣā tathāetāsāṃ tanayāścāpi kṛṣiyogamupāsateइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें