महाभारत 13.82.35
त्रयाणामपि लोकानामुपरिष्टान्निवत्स्यसिमत्प्रसादाच्च विख्यातो गोलोकः स भविष्यति
trayāṇāmapi lokānāmupariṣṭānnivatsyasimatprasādācca vikhyāto golokaḥ sa bhaviṣyati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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