महाभारत 13.83.27
दश पूर्वान्दश परांस्तथा संतारयन्ति तेसुवर्णं ये प्रयच्छन्ति एवं मे पितरोऽब्रुवन्
daśa pūrvāndaśa parāṃstathā saṃtārayanti tesuvarṇaṃ ye prayacchanti evaṃ me pitaro'bruvan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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