महाभारत 13.83.55
आदित्या वसवो रुद्रा मरुतोऽथाश्विनावपिसाध्याश्च सर्वे संत्रस्ता दैतेयस्य पराक्रमात्
ādityā vasavo rudrā maruto'thāśvināvapisādhyāśca sarve saṃtrastā daiteyasya parākramāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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