महाभारत 13.84.19
एतद्वाक्यमुपश्रुत्य ततो देवा महात्मनःजग्मुः संसिद्धसंकल्पाः पर्येषन्तो विभावसुम्
etadvākyamupaśrutya tato devā mahātmanaḥjagmuḥ saṃsiddhasaṃkalpāḥ paryeṣanto vibhāvasum
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें