महाभारत 13.84.2
तस्माद्भयं समुत्पन्नमस्माकं वै पितामहपरित्रायस्व नो देव न ह्यन्या गतिरस्ति नः
tasmādbhayaṃ samutpannamasmākaṃ vai pitāmahaparitrāyasva no deva na hyanyā gatirasti naḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें