महाभारत 13.85.28
अथाब्रवील्लोकगुरुर्ब्रह्मा लोकपितामहःममैव तान्यपत्यानि मम शुक्रं हुतं हि तत्
athābravīllokagururbrahmā lokapitāmahaḥmamaiva tānyapatyāni mama śukraṃ hutaṃ hi tat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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