महाभारत 13.85.4मूर्तिमन्ति च सामानि यजूंषि च सहस्रशःऋग्वेदश्चागमत्तत्र पदक्रमविभूषितःmūrtimanti ca sāmāni yajūṃṣi ca sahasraśaḥṛgvedaścāgamattatra padakramavibhūṣitaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें