महाभारत 13.85.53
एवमेतत्पुरा वृत्तं तस्य यज्ञे महात्मनःदेवश्रेष्ठस्य लोकादौ वारुणीं बिभ्रतस्तनुम्
evametatpurā vṛttaṃ tasya yajñe mahātmanaḥdevaśreṣṭhasya lokādau vāruṇīṃ bibhratastanum
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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