महाभारत 13.85.54
अग्निर्ब्रह्मा पशुपतिः शर्वो रुद्रः प्रजापतिःअग्नेरपत्यमेतद्वै सुवर्णमिति धारणा
agnirbrahmā paśupatiḥ śarvo rudraḥ prajāpatiḥagnerapatyametadvai suvarṇamiti dhāraṇā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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