महाभारत 13.85.5
लक्षणानि स्वराः स्तोभा निरुक्तं स्वरभक्तयःओंकारश्चावसन्नेत्रे निग्रहप्रग्रहौ तथा
lakṣaṇāni svarāḥ stobhā niruktaṃ svarabhaktayaḥoṃkāraścāvasannetre nigrahapragrahau tathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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