महाभारत 13.85.61
ददात्युदितमात्रे यस्तस्य पाप्मा विधूयतेमध्याह्ने ददतो रुक्मं हन्ति पापमनागतम्
dadātyuditamātre yastasya pāpmā vidhūyatemadhyāhne dadato rukmaṃ hanti pāpamanāgatam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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